प्रतिनिधि बन्धुओं, देवियों तथा सज्जनों
इस संदर्भ में यह भी विचारणीय है कि इस चीनी आक्रमण को जनता से बहुत दिनों तक छिपाया गया और संभवतः अपनी विदेशी नीति की असफलता को छिपाने के लिए ही हमारे प्रधानमंत्री भी चीनी आक्रमण को जनता से छुपाने का प्रयत्न करते रहे। अपने सुरक्षा मंत्री का संदिग्ध व्यक्तित्व भी राष्ट्र के लिए चिन्ता का विषय है और उचित तो यह है कि ऐसे समय में कोई ऐसा व्यक्ति सुरक्षा मंत्री के पद पर हो जिस पर राष्ट्र का पूर्ण विश्वास हो। किन्तु हमारे प्रधानमंत्री अपने हठी स्वभाव के कारण तथा अपनी मित्रता निभाने के हेतु सुरक्षा मंत्री को हटाने की बात तो दूर रही उनको राष्ट्रभक्ति का प्रमाण पत्र दे रहे हैं। इस प्रकार के प्रमाण पत्र पहले भी हमारे प्रधानमंत्री अनेक व्यक्तियों को देते रहे हैं। शेख़ अब्दुल्ला का भी काण्ड जनता को भूला नहीं होगा। स्थिति यह है कि आज पं० नेहरू की सारी विदेश नीति बुरी तरह केवल असफल ही नहीं हुई वरन राष्ट्र के लिए घातक तथा हानिकर भी सिद्ध हुई है और यह विधि की विडम्बना ही कहनी चाहिए कि हमारे प्रधानमंत्री जो अपनी विदेश नीतियों में सदा असफल रहे है आज भी प्रधानमंत्री पद पर बने हुए हैं।
चीनी आक्रमण के साथ हमारा ध्येय अपने देश के उन भाइयों की ओर जाता है जिन्हें हम कम्युनिस्ट कहते हैं। विदेशी आक्रमण का खुल्लम खुल्ला समर्थन तथा पक्षपात करना और अपने ही राष्ट्र के प्रति घातक कारवाई करना इनका स्वभाव बन गया है और आश्चर्य तो तब होता है कि जब ये अपनी इन हरकतों पर पश्चात्ताप तथा लज्जा का अनुभव करना तो दूर रहा वरन उल्टे भारत में भारत विरोधी प्रचार करने की धृष्टता निरन्तर कर रहे हैं। जनता को धोखा देने के लिए आपस में भेदभाव का प्रदर्शन करना तथा अपनी एक नीति को प्रति दूसरे दिन बदलने की घोषणा करना भी इनका स्वभाव सा बन गया है। चीनी आक्रमण के समय राष्ट्र का ध्यान उधर से हटाने के लिए भीतरी अशांति पैदा करने जैसा घृणित व्यवहार करने में किंचित मात्र भी हिचकिचाहट का अनुभव नहीं करते।इस पार्टी ने देश में जयचंदों की परम्परा का निर्माण कर दिया है और थोड़े दिनों से जनता को भी चीन के प्रति अनुरक्त बनाने के हेतु उन्होंने जिहाद छेड़ दिया है और राष्ट्र विरोधी प्रचार में योजना पूर्वक संलग्न हो गए हैं। क्या ऐसी पार्टी को पूर्ण स्वतंत्रता के साथ देश में विध्वंसकारी तथा अराजकता पूर्ण वातावरण निर्माण करने के लिए योजना पूर्वक कार्य करते रहने देना राष्ट्र के लिए हितकर होगा?
