लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी – जीवन परिचय
लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी : प्रारम्भिक काल खंड [ १९०८ – १९३० ]
उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल, अतीत की जकड़न में लगभग निष्पंद पूर्वांचल, अपने महिमा मंडन के लिए उधार के महापुरुषों की खोज में निरंतर प्रयासरत पूर्वांचल सदा सर्वदा कुछ कुछ नामों पर आकर ठहर जाता है। देवरहा बाबा पूर्वांचल के शीर्ष पुरुष हैं। शायर फ़िराक़ गोरखपुरी और चित्रकार अमृता शेरगिल, समाज सेवी बाबा राघव दास तथा पूर्व प्रधान मंत्री चंद्रशेखर कुछ अन्य नाम हैं जिनके ऊपर पूर्वांचल का कुंठित समाज गर्व का अनुभव कर लेता है। अगर पूरे पूर्वांचल की यह स्थिति है तब देवरिया जनपद की क्या स्थिति होगी इसकी कल्पना की जा सकती है।
देवरिया की आत्मश्लाघा की यात्रा देवरहा बाबा से आरंभ होकर बाबा राघव दास पर आकर थम जाती है। लेकिन अगर हम अतीत में झांकने का थोड़ा प्रयास करें तो देवरिया के ऐसे अनेक व्यक्तियों और व्यक्तित्वों के दर्शन होंगे जिन्होंने समय की शिला पर अपने हस्ताक्षर अंकित कराए हैं। यह अन्य बात है कि समय की धूल ने उन नामों को धुंधला कर दिया है और इसीलिए आजकल की पीढ़ी उनके नाम से अपरिचित है। इन्हीं में से एक नाम श्री लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी का है।
लक्ष्मी कान्त चतुर्वेदी : राजनीति काल खंड [ १९५२ – १९७४ ]
